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जिंदल फाउंडेशन पर गंभीर आरोप – स्वतंत्रता दिवस पर फफूँद लगे रागी लड्डू का वितरण….सरपंच कमलेश डनसेना व पंचायत के पंचों ने तुरंत लोगों को लड्डू खाने से रोका….इसके बाद सरपंच और ग्रामीणों ने जिंदल प्रबंधन को जानकारी दी…एक एक कर करीब पांच मिठाई के डब्बे खोलने पर सभी मिठाइयों में फफूंदी लगी हुई थी,और मिठाइयों से दुर्गंध आ रही थी। जिंदल स्टील लिमिटेड के जिंदल फाउंडेशन द्वारा आश्रित ग्राम कोसम नारा में हर वर्ष की तरह इस बार भी 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को रागी (मिलेट्स) लड्डू बांटे गए। लेकिन इस बार वितरण किए गए लड्डुओं में फफूँद और कीड़े पाए जाने का आरोप सरपंच और ग्रामीणों ने लगाया है….

साकेत पाण्डेय.... 7869475276.....

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शहर से लगे निकटतम ग्राम कोसमनारा में स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में उस वक्त हड़कंप मच गया जब 79 वें गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के सामने जिंदल प्रबंधन के द्वारा भेजे गए रागी के लड्डुओं के डब्बों को खोला गया। एक एक कर करीब पांच मिठाई के डब्बे खोलने पर सभी मिठाइयों में फफूंदी लगी हुई थी,और मिठाइयों से दुर्गंध आ रही थी। जिंदल स्टील लिमिटेड के जिंदल फाउंडेशन द्वारा आश्रित ग्राम कोसम नारा में हर वर्ष की तरह इस बार भी 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को रागी (मिलेट्स) लड्डू बांटे गए। लेकिन इस बार वितरण किए गए लड्डुओं में फफूँद और कीड़े पाए जाने का आरोप सरपंच और ग्रामीणों ने लगाया है।

 

ग्रामीणों के मुताबिक, जैसे ही यह बात सामने आई, सरपंच कमलेश डनसेना व पंचायत के पंचों ने तुरंत लोगों को लड्डू खाने से रोका। इसके बाद सरपंच और ग्रामीणों ने जिंदल प्रबंधन को जानकारी दी। आरोप है कि मौके पर पहुंचे कंपनी के अधिकारी लड्डू की जांच करवाने के बजाय “सेटलमेंट” की कोशिश करने लगे।

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सरपंच कमलेश डनसेना ने कहा—

 

“जिंदल फाउंडेशन द्वारा फफूँद और कीड़े लगे रागी लड्डू बांटकर ग्रामीणों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया गया है। यह लापरवाही आम जनता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। खाद्य विभाग को तत्काल जांच करनी चाहिए।ग्रामीणों का कहना है कि जिंदल फाउंडेशन की ऐसी लापरवाहियां और विवादित घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। अब वे मांग कर रहे हैं कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

 

इस बात को लेकर सरपंच प्रतिनिधि कमलेश डनसेना ने प्रबंधन से बात की तो उन्हें कहा मिठाई हमने नहीं बनाई है जो भेज दिए है उसी में काम चलाओ।

 

घटना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और स्कूली बच्चों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना था अगर मिठाई नहीं देनी थी तो नहीं देते लेकिन इस तरह की घटिया मिठाई देकर मासूम बच्चों के स्वास्थ्य से खेलना गलत है। अगर ये मिठाई बच्चों को बांट दी जाती तो उन्हें सीधे अस्पताल में भर्ती होना पड़ जाता। वही गांव की महिला सरपंच का कहना है कि जिंदल प्रबंधन की इस गलती को माफ नहीं किया जा सकता है अतः वो प्रशासन से मांग करेंगी कि मिठाइयों का सैंपल जांच करवाया जाकर लापरवाह जिंदल के अफसरों के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाए। जिंदल प्रबंधन इस तरह करीब 30 आश्रित गांवों में हर साल स्वतंत्रता दिवस की मिठाइयां भेजता है। यदि बाकी अन्य गांवों में यही मिठाई भेजी गई होगी और उसे बच्चों में वितरित किया गया होगा तो बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है। हालाकि अब तक ग्राम कोसमनारा के अलावा अन्य किसी आश्रित गांवों से इस तरह कि सूचना नहीं आई है। सरपंच की माने तो एक बड़ी घटना होते होते टल गई।


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