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वेदांता कोल प्रोजेक्ट पर संग्राम….अब बरगढ़ खोला के आदिवासियों ने भरी हुंकार..सरकार ने दिया अगर उद्योगपतियों का साथ तो होगी तमनारकांड की पुनरावृत्ति… रायगढ़ लोकसभा सांसद को ज्ञापन सौंप किया एलान-ए -जंग का शंखनाद… रायगढ़ में वेदांता के कोल प्रोजेक्ट पर संग्राम आदिवासियों का हुंकार: “जल-जंगल-जमीन नहीं देंगे” — सांसद राधेश्याम राठिया को सौंपा ज्ञापन

साकेत पाण्डेय...... 7869475276....

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वेदांता कोल प्रोजेक्ट पर संग्राम….अब बरगढ़ खोला के आदिवासियों ने भरी हुंकार..सरकार ने दिया अगर उद्योगपतियों का साथ तो होगी तमनारकांड की पुनरावृत्ति… रायगढ़ लोकसभा सांसद को ज्ञापन सौंप किया एलान-ए -जंग का शंखनाद…

रायगढ़ में वेदांता के कोल प्रोजेक्ट पर संग्राम

आदिवासियों का हुंकार: “जल-जंगल-जमीन नहीं देंगे” — सांसद राधेश्याम राठिया को सौंपा ज्ञापन

 

रायगढ़। खरसिया विकासखंड के बरगढ़ खोला वनांचल में प्रस्तावित वेदांता (बाल्को) के कोयला उत्खनन और सर्वेक्षण कार्य को लेकर माहौल गरमा गया है। स्थानीय आदिवासी और ग्रामीण खुलकर विरोध में उतर आए हैं। सैकड़ों ग्रामीणों ने रायगढ़ के सांसद राधेश्याम राठिया को ज्ञापन सौंपते हुए परियोजना को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

“पांचवीं अनुसूची का क्षेत्र, हमारी अनुमति के बिना नहीं होगा फैसला”

ग्रामीणों का कहना है कि पूरा इलाका भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है। साथ ही 8 अगस्त 2022 से लागू पेसा (PESA) अधिनियम के तहत जल, जंगल और जमीन पर ग्रामसभा के अधिकार सर्वोपरि हैं। उनका आरोप है कि बरई कोल ब्लॉक का आवंटन बिना स्थानीय सहमति के किया गया तो यह कानून और परंपरा दोनों के खिलाफ होगा।

12 से अधिक गांवों पर अस्तित्व का खतरा

ज्ञापन में दावा किया गया है कि प्रस्तावित खनन से बरगढ़ खोला वनांचल के 12 से अधिक गांवों का भविष्य दांव पर लग जाएगा। यह क्षेत्र ऊंचे पहाड़ों और मांद व बोरोई नदियों से घिरा प्राकृतिक वन क्षेत्र है, जहां आदिवासी समुदाय की संस्कृति, देवी-देवताओं के स्थल और पूर्वजों की स्मृतियां जुड़ी हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कोयला उत्खनन से हजारों एकड़ घना जंगल, वन्यजीव और स्थानीय ‘बनगहियां’ बोली-संस्कृति पर सीधा प्रहार होगा।

 

चेतावनी: “जमीन नहीं छोड़ेंगे”

ग्रामीणों ने दो टूक कहा है कि आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।

अब सबकी नजरें सांसद के पास पहुंचे इस ज्ञापन पर टिकी हैं—क्या परियोजना पर पुनर्विचार होगा या संघर्ष और तेज होगा?

संदेश साफ: रायगढ़ में कोल प्रोजेक्ट अब सिर्फ विकास बनाम पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि अधिकार और अस्तित्व की लड़ाई बनता जा रहा है।


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