10 फ़िट की गली मे तीन तीन कॉलोनी काटने का काला खेल !!!!!!! कान्हा ग्रिन्स के साथ दो अन्य कॉलोनी को अनुमति मिलना RERA के गड़बड़ कार्यप्रणाली को दर्शाता हैं !!!!!! इन रसूखदार कॉलोनाजरों का कैसे मिल जाती हैं अनुमति !!!!!!
साकेत पाण्डेय..... 7869475276.....


कान्हा ग्रीन्स, साईं मंगलम, और स्वर्ण भूमि जैसी कॉलोनियों के निर्माण में हुई कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाता है। सड़क की चौड़ाई: नियमों के अनुसार 40 फ़िट की रोड होनी चाहिए, लेकिन कथित तौर पर मात्र 10 फ़िट की गली वाली ज़मीन पर तीन-तीन कॉलोनियों को अनुमति दे दी गई।सरकारी अधिकारियों, पटवारी और आर.आई. (RI) पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

प्रशासनिक अनदेखी ‘रेरा’ (RERA) जैसे संस्थान और स्थानीय प्रशासन रसूखदार लोगों के आगे नतमस्तक हैं और नियमों की बलि दी जा रही है।
जनता की परेशानी: कागजों पर 10 फ़िट की गली को 30 फ़िट का मुख्य मार्ग दिखाकर किए गए इस निर्माण से अब आम जनता को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर एक संकरी गली को चौड़ी सड़क के रूप में दिखाकर प्रोजेक्ट पास कराने के आरोपों के लिए हैं।

डॉ. शलभ अग्रवाल के निवास के पास स्थित लगभग आधा किलोमीटर लंबी संकरी गली को कागजों पर चौड़ी सड़क दिखाया गया है।
कॉलोनियों का निर्माण: इसी एक गली के आधार पर साईं मंगलम, स्वर्ण भूमि, कान्हा ग्रीन्स और एक अन्य प्रोजेक्ट खड़े कर दिए गए हैं।

ट्रैफिक की समस्या: बुनियादी ढांचे के अभाव के कारण यहाँ रोजाना भीषण जाम लगता है, जिससे स्थानीय निवासी परेशान हैं।
मिलीभगत के आरोप: इसमें रेरा (RERA), जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

आरोप है कि रेरा अधिकारी बिना जमीनी हकीकत देखे प्रोजेक्ट्स को क्लीयरेंस दे रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 10 फीट की गली को 30 फीट के रास्ते के रूप में कैसे सत्यापित किया गया?

राजस्व विभाग की अनदेखी: 10 फीट की गली को 30 फीट के रास्ते के रूप में कैसे सत्यापित किया गया? यह राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्न है।

प्रशासनिक नतमस्तकः स्थानीय प्रशासन बिल्डरों के ‘आभामंडल’ और प्रभाव के आगे मौन खड़ा है, जिससे अवैध को वैध बनाने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।






