वेदांता की जन सुनवाई संपन्न कराने किसी भी हद तक जा सकता है पर्याबरण विभाग ……. वेदांता की जमकर दलाली कर रहे है जन प्रतिनिधि अधिकारी कर्मचारी ….पर्यावरण प्रदूषण और भू जल का जबरदस्त तरीके से होगा दोहन ….

साकेत पांडेय…..7869475286
जनसुनवाई कराने पर्यावरण विभाग
ने कसी कमर हो कर रहेगा विस्तार
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जिले के पर्यावरण विभाग ने साबित कर दिया है कि वो उद्योग पत्तियों के लिए कुछ भी कर सकती है इसका एक उदाहरण वेदांता की होने वाली जनसुनवाई है जिसके लिए प्रशासन ने सारे नियम कायदों को तांक पर रख दिया है ओर यह मेहरबानी कोई मुफ्त में नही की इस हेराफेरी के लिए भी अधिकारियों ने लाखो रुपए वसूल किए है तब कही जाकर उसने पुरानी ईआई ए पर ही

जनसुनवाई का नोटिस जारी कर दिया पूरे मामले का खुलासा करते हुए जनचेतना मंच के रमेश अग्रवाल ने इस पूरी साजिश का भंडा फोड़ किया है उन्होंने बताया की वेदांता कि 23 फरवरी को जो जनसुनवाई होगी वह कोल वाशरी और आयरन एवं बेनिफिकेशकन प्लांट के लिए तय की गई है जबकि समाचार पत्रों में छपे विज्ञापन में विभाग ने इस जन सुनवाई को आयरन और बेनिफिकेशन प्लांट के लिए होना दर्शाया है जब इसकी पूरी जानकारी के लिए पर्यावरण विभाग की वेबसाइट enviscecb.org पर जाए तो पता चला कि ई आई ए केवल बेनिफिकेशन प्लांट की दी गई है यदि इसके लिये वेबसाइट की बाईं तरफ बने मेनू पर जाकर Public Co nstatation पर क्लिक किया जाए तो वंहा 635 सुनवाईयों की लिस्ट मिलेगी जिसमें से 440 नंबर पर वेदांता जनसुनवाई की तारीख और अंग्रेजी व हिंदी की ई.आई.ए.(समरी) दी गई है जो कि केवल आयरन ओर बेनिफिकेशन प्लांट की है इस प्लांट की जनसुनवाई पहले 1जून 2022 को होनी थी लेकिन अज्ञात कारणों से उसे रद्द कर दिया गया और अब जब कोल वाशरी और आयरन ओर बेनिफिकेशकन प्लांट की जन सुनवाई का प्रस्ताव आया तो विभाग ने केवल जनसुनवाई की तारीख को बदला लेकिन ई.आई.ए. 2022 का ही उसमे चस्पा कर दिया यह सिर्फ वेदांता के साथ हुआ हो ऐसा नहीं है इसके पहले रूपेश स्टील की जनसुनवाई में भी विभाग ने पुरानी और दूसरी जनसुनवाई की ई आई ए रिपोर्ट लगा दी थी यह गोरख धंधा इस लिए चल रहा है कि इसकी जांच करने वाला कोई नहीं है और सारे काम पैसे खिलाकर किया जाता है इसलिए कुछ भी काला पीला किया जाए कोई बोलने वाला नही है कोरवो के राज में धृतराष्ट्रओ की कोई कमी नहीं है जिसे भी चांदी का जूता पड़ेगा वो आंख बंद कर जिले के चीर हरण का मुख दर्शक बन जायेगा फिर रायगढ़ जिले के पर्यावरण विभाग का तो कोई माई बाप ही नही है अंधे के हाथ लगी बटेर की कहावत इस विभाग पर पूरी तरह सही उतरती है जेब गर्म करने के लिए विभाग के अधिकारियो को न तो सरकार की बदनामी का डर है और नही जनता के हितों से उसे कोई सरोकार है लोग तो यही नहीं समझ पा रहे की ऐसी फर्जी जन सुनवाई करने की जरूरत ही क्या है प्लांट का मालिक और अधिकारी यदि राजी है तो सरकार और जनता क्या करेगी क्यों जनता के नाम पर इस तरह की सुनवाई का ढोंग रचा जा रहा है सीधे विस्तार की अनुमति विभाग जारी क्यों नहीं कर देता दिखावे की निष्पक्षता (धोखधड़ी) तो पूरे सच से भी ज्यादा खतरनाक होती है जिले के लोग जानते है की (टैक्स) कर और रायलटी की कमाई से अपना खजाना भरने के लिए सरकारों ने जिले में अंधाधुंध उद्योग स्थापित किए है जिसने लोगो का जीना हराम कर दिया है अब उधोग धंधों को बंद तो नही किया जा सकता लेकिन उनके विकास को तो रोका जा सकता है सरकार को विस्तार की अनुमति किसी को नही देनी चाहिए ताकि जिले की आब हवा और जल जंगल जमीन का और नुकसान न हो यदि इतना भी हमारी सरकारें करे तो जनता के लिए यह भी एक बड़ा कदम साबित हो सकता है जिस से लोगो को प्रदूषण रोकने और भ्रष्ट्राचार मिटाने के उनके चुनावी वायदे पर विश्वास हो सकेगा वरना जब 100 साल पुरानी काग्रेस को जनता दड़बे की मुर्गी बना सकती है तो पांच साल का वनवास भोगने वाली इस सरकार की तो उनके सामने बिसात ही क्या है ?
अब वेदांता की बारी
जनसुनवाई कराने पर्यावरण विभाग
ने कसी कमर हो कर रहेगा विस्तार
जिले के पर्यावरण विभाग ने साबित कर दिया है कि वो उद्योग पत्तियों के लिए कुछ भी कर सकती है इसका एक उदाहरण वेदांता की होने वाली जनसुनवाई है जिसके लिए प्रशासन ने सारे नियम कायदों को तांक पर रख दिया है ओर यह मेहरबानी कोई मुफ्त में नही की इस हेराफेरी के लिए भी अधिकारियों ने लाखो रुपए वसूल किए है तब कही जाकर उसने पुरानी ईआई ए पर ही जनसुनवाई का नोटिस जारी कर दिया पूरे मामले का खुलासा करते हुए जनचेतना मंच के रमेश अग्रवाल ने इस पूरी साजिश का भंडा फोड़ किया है उन्होंने बताया की वेदांता कि 23 फरवरी को जो जनसुनवाई होगी वह कोल वाशरी और आयरन एवं बेनिफिकेशकन प्लांट के लिए तय की गई है जबकि समाचार पत्रों में छपे विज्ञापन में विभाग ने इस जन सुनवाई को आयरन और बेनिफिकेशन प्लांट के लिए होना दर्शाया है जब इसकी पूरी जानकारी के लिए पर्यावरण विभाग की वेबसाइट enviscecb.org पर जाए तो पता चला कि ई आई ए केवल बेनिफिकेशन प्लांट की दी गई है यदि इसके लिये वेबसाइट की बाईं तरफ बने मेनू पर जाकर Public Co nstatation पर क्लिक किया जाए तो वंहा 635 सुनवाईयों की लिस्ट मिलेगी जिसमें से 440 नंबर पर वेदांता जनसुनवाई की तारीख और अंग्रेजी व हिंदी की ई.आई.ए.(समरी) दी गई है जो कि केवल आयरन ओर बेनिफिकेशन प्लांट की है इस प्लांट की जनसुनवाई पहले 1जून 2022 को होनी थी लेकिन अज्ञात कारणों से उसे रद्द कर दिया गया और अब जब कोल वाशरी और आयरन ओर बेनिफिकेशकन प्लांट की जन सुनवाई का प्रस्ताव आया तो विभाग ने केवल जनसुनवाई की तारीख को बदला लेकिन ई.आई.ए. 2022 का ही उसमे चस्पा कर दिया यह सिर्फ वेदांता के साथ हुआ हो ऐसा नहीं है इसके पहले रूपेश स्टील की जनसुनवाई में भी विभाग ने पुरानी और दूसरी जनसुनवाई की ई आई ए रिपोर्ट लगा दी थी यह गोरख धंधा इस लिए चल रहा है कि इसकी जांच करने वाला कोई नहीं है और सारे काम पैसे खिलाकर किया जाता है इसलिए कुछ भी काला पीला किया जाए कोई बोलने वाला नही है कोरवो के राज में धृतराष्ट्रओ की कोई कमी नहीं है जिसे भी चांदी का जूता पड़ेगा वो आंख बंद कर जिले के चीर हरण का मुख दर्शक बन जायेगा फिर रायगढ़ जिले के पर्यावरण विभाग का तो कोई माई बाप ही नही है अंधे के हाथ लगी बटेर की कहावत इस विभाग पर पूरी तरह सही उतरती है जेब गर्म करने के लिए विभाग के अधिकारियो को न तो सरकार की बदनामी का डर है और नही जनता के हितों से उसे कोई सरोकार है लोग तो यही नहीं समझ पा रहे की ऐसी फर्जी जन सुनवाई करने की जरूरत ही क्या है प्लांट का मालिक और अधिकारी यदि राजी है तो सरकार और जनता क्या करेगी क्यों जनता के नाम पर इस तरह की सुनवाई का ढोंग रचा जा रहा है सीधे विस्तार की अनुमति विभाग जारी क्यों नहीं कर देता दिखावे की निष्पक्षता (धोखधड़ी) तो पूरे सच से भी ज्यादा खतरनाक होती है जिले के लोग जानते है की (टैक्स) कर और रायलटी की कमाई से अपना खजाना भरने के लिए सरकारों ने जिले में अंधाधुंध उद्योग स्थापित किए है जिसने लोगो का जीना हराम कर दिया है अब उधोग धंधों को बंद तो नही किया जा सकता लेकिन उनके विकास को तो रोका जा सकता है सरकार को विस्तार की अनुमति किसी को नही देनी चाहिए ताकि जिले की आब हवा और जल जंगल जमीन का और नुकसान न हो यदि इतना भी हमारी सरकारें करे तो जनता के लिए यह भी एक बड़ा कदम साबित हो सकता है जिस से लोगो को प्रदूषण रोकने और भ्रष्ट्राचार मिटाने के उनके चुनावी वायदे पर विश्वास हो सकेगा वरना जब 100 साल पुरानी काग्रेस को जनता दड़बे की मुर्गी बना सकती है तो पांच साल का वनवास भोगने वाली इस सरकार की तो उनके सामने बिसात ही क्या है ?







