मीना बाजार संचालन के कारण ट्रैफिक जाम, ध्वनि प्रदूषण, और सार्वजनिक असुविधा जैसी समस्यां लगातार बढ़ रही हैं. साथ ही नियमों को ताक पर रखकर जिस तरह अस्थायी दुकानों को अनुमति दी गई है…..बजरंग दल का विरोध… मीडिया का विरोध… निगम का नोटिस क्या मीना बाजार संचालक के आगे बौने साबित होते है…..मारपीट छेड़खानी जैसी घटनाये यहाँ आम बात है…. पुलिस प्रशासन रहता है नित्य परेशान…. बिना प्रशासनिक अनुमति के आखिर कैसे सज गया इस मर्तबा मीनाबाजार वो भी तीन तीन…..


मीना बाजार संचालन के कारण ट्रैफिक जाम, ध्वनि प्रदूषण, और सार्वजनिक असुविधा जैसी समस्यां लगातार बढ़ रही हैं. साथ ही नियमों को ताक पर रखकर जिस तरह अस्थायी दुकानों को अनुमति दी गई है…..बजरंग दल का विरोध… मीडिया का विरोध… निगम का नोटिस क्या मीना बाजार संचालक के आगे बौने साबित होते है…..मारपीट छेड़खानी जैसी घटनाये यहाँ आम बात है…. पुलिस प्रशासन रहता है नित्य परेशान…. बिना प्रशासनिक अनुमति के आखिर कैसे सज गया इस मर्तबा मीनाबाजार वो भी तीन तीन…..
मीना बाजार संचालक इतने पावरफुल है की उन्हें जिला प्रशासन नगर निगम और माननीय न्यायालय का भी भय नहीं है… इनको ना लगने दिया जाए की इच्छा रखने वालों को नाना प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है….
शहर में संचालित होने जा रहा मीना बाजार एक बार फिर विवादों में है. स्थानीय नागरिकों और व्यापारी संगठनों ने मीना बाजार के संचालन को लेकर फिर से हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है. यह वही मामला है, जिसमें पिछले वर्ष भी याचिका लगाई गई थी, लेकिन पर्याप्त दस्तावेजों और तकनीकी कारणों के अभाव में राहत नहीं मिल पाई थी.इस बार याचिकाकर्ता पूरी तैयारी के साथ कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले हैं. उनके मुताबिक बाजार संचालन के कारण ट्रैफिक जाम, ध्वनि प्रदूषण, और सार्वजनिक असुविधा जैसी समस्यां लगातार बढ़ रही हैं. साथ ही नियमों को ताक पर रखकर जिस तरह अस्थायी दुकानों को अनुमति दी गई है उस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि निगम ने जिन शर्तों पर मीना बाजार को अस्थायी अनुमति दी थी, उसका पालन नहीं किया गया. बाजार के लिए तय क्षेत्र से बाहर तक दुकानें लग गई, जिसके चलते मुख्य सड़क पर ट्रैफिक पूरी तरह बाधित हो जाता है. इसके अलावा कई दुकानों में तेज आवाज में डीजे और स्पीकर बजाए जाते हैं, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी असुविधा होती है.पिछले साल जब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा तब कोर्ट ने यह कहकर याचिका खारिज कर दी थी कि याचिकाकर्ता पर्याप्त प्रमाण नहीं दे सके. कोर्ट ने यह भी कहा था कि याचिकाकर्ता को पहले इस विषय में अपनी याचिका देने का अवसर मिलना चाहिए. अब तक जल कर, बिजली-पानी के आउटस्टैंडिंग और निगम से प्राप्त दस्तावेजों, बिल्डिंग रिपोर्ट, और चौकिंग सर्वे के आधार पर केस पेश तैयार किया है.शहर के व्यापारियों का कहना है कि मीना बाजार के लगने से उनका व्यापार पिछले कई वर्षों से प्रभावित हुआ है. पिछले साल भी व्यापारी नुकसान में रहे हैं. इस साल भी वे नुकसान से डर से त्रस्त रहेंगे. और मामले को लेकर शांत भी लगे हैं. एक स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि प्रत्येक एक मेला लगता है.

लेकिन इस साल तीन तीन बाजार लगने की तैयारी है. ऐसे में एक महीने तक बिक्री पर असर पड़ेगा. प्रशासनिक चुप्पी और बढ़ती अव्यवस्थाओं के बीच अब स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने साफ कर दिया है कि अगर कोर्ट से न्याय नहीं मिला, तो अब सड़क पर उतरकर संघर्ष करेंगे. मीना बाजार को लेकर कई बार शिकायते की गई, याचिका भी दायर हुई, लेकिन स्थिति जस की तस है. अब जनता खुलकर सामने आ रही है और जल्द ही विरोध प्रदर्शन, जनसभा और रैली के माध्यम से दबाव बनाने की रणनीति बनाई जा रही है.याचिकाकर्ता इस बार मामले को जनहित याचिका के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं. याचिका में निगम प्रशासन की ओर से दी गई स्वीकृति प्रक्रिया, उसके प्रावधान, बाजार के सुरक्षा मानकों, फायर सेफ्टी, स्वच्छता, ट्रैफिक और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी सभी शर्तों सहित आदि को चुनौती दी जाएगी. इस याचिका में मीना बाजार के संचालन पर कोई रोक लगाने की मांग की जाएगी.

मीना बाजार के विरोध में आंदोलनरत जनता खासकर व्यवसायियों पूरा तरह एकजुटता जारी है. ऐसी पार्टी के लोगों और लोगों को जानकारी भी भारी परेशानी है. खासकर महिला बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को असुविधाएं का करना मुश्किल हो जाती, खासकर भी कठिन होता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मीना बाजार के विरोध में आंदोलनरत जनता को भारी परेशानी है, जिसमें निगम को भी स्पष्ट जवाब देना चाहिए. और इस तरह के ट्रैफिक जाम पर नियंत्रण हो जाता है, पर अब कोई शक्ति हो सकता है.













