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नानक बंसल और मुकेश बंसल का प्रणामी प्लाईवुड से नलवा और नलवा से बाराद्वार का सफर क्या इसी तरह का रहा !!!!! ढीमरापुर मे शानदार आलिशान महल के निर्माण मे क्या बाराद्वार का है कनेक्शन ?????? क्या ऐसे और फर्जीवाड़े है इनके जो दमदार प्रार्थी ना होने की वजह से दब गए !!!!! जालसाजी.. जान से मारने की धमकी देना क्या यही इनका शगल है !!!!! अभी तक सब ठीक था अचानक से तीन तीन FIR समझ से परे है !!!!!!! बाराद्वार डोलोमाइट काण्ड क्या इनको स्टॉप करेगा !!!! देखना यह होगा की पुलिस इस मामले मे क्या एक्शन लेगी?????

साकेत पाण्डेय..... 7869475276....

News of Mirror

 

नानक बंसल और मुकेश बंसल का प्रणामी प्लाईवुड से नलवा और नलवा से बाराद्वार का सफर क्या इसी तरह का रहा !!!!! ढीमरापुर मे शानदार आलिशान महल के निर्माण मे क्या बाराद्वार का है कनेक्शन ?????? क्या ऐसे और फर्जीवाड़े है इनके जो दमदार प्रार्थी ना होने की वजह से दब गए !!!!! जालसाजी.. जान से मारने की धमकी देना क्या यही इनका शगल है !!!!! अभी तक सब ठीक था अचानक से तीन तीन FIR समझ से परे है !!!!!!! बाराद्वार डोलोमाइट काण्ड क्या इनको स्टॉप करेगा !!!! देखना यह होगा की पुलिस इस मामले मे क्या एक्शन लेगी?????

 

नानक बंसल और मुकेश बंसल कोतरा रोड मे प्रणामी प्लाइवुड से अपनी कारोबारीय यात्रा प्रारम्भ किये। यहाँ से नलवा मे इन्हे काम मिला नलवा से बंसल बंधुओ को बाराद्वार के डोलोमाइट का काम मिला यहाँ से प्रारम्भ हुआ इनके पनपने का। आज बंसल बंधु अकूत सम्पत्ति के मालिक है। रायगढ़ के ढीमरापुर का आलिशान बंगला सभी को भाता है। अभी तक सब ठीक चल रहा था लेकिन अचानक एक के बाद एक तीन तीन FIR इनके लिए परेशानी का सबब बन रहा है।

नानक बंसल और मुकेश बंसल की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही है… एक के बाद एक FIR का तोहफा इन्हे मिल रहा है.. इन कुबेर पुत्रो पर पुलिस के कार्यवाही की गाज कब गिरेगी देखना यह है… रायगढ़ के प्रसिद्ध व्यवसायी बंसल बंधु इन दिनों कानूनी शिकंजे में बुरी तरह फंसे हुए नजर आ रहे हैं। एक के बाद एक आपराधिक मामलों में नाम सामने आने से जिले में सनसनी फैल गई है। डोलोमाइट खनन से लेकर जंगल में अवैध सड़क निर्माण और धमकी जैसे मामलों में अब तक तीन गंभीर प्रकरण बंसल बंधुओं के नाम दर्ज हो चुके हैं।

पहले मामले मे डोलोमाइट खनन में शर्तों का उल्लंघन और जान से मारने की धमकी 17 जुलाई 2025 को रघुवीर सिंह सिसोदिया, निवासी रायगढ़, ने पुलिस से शिकायत की कि मुकेश बंसल और नानक बंसल ने डोलोमाइट खनन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए उनके साथ छल किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। इस पर थाना बाराद्वार में धारा 420 (धोखाधड़ी), 506 (धमकी) और 34 (साझा अपराध) के तहत मामला पंजीबद्ध हुआ।

दूसरे मामले मे अव्यवस्थित खदान संचालन और गाली-गलौज की धमकी

11 जुलाई को ग्राम जेठा निवासी गणेशराम चंद्रा ने पुलिस को बताया कि मंगल मिनरल्स की खदान, जिसका संचालन मुकेश बंसल द्वारा किया जा रहा था, उसे बिना सुरक्षा उपायों के अचानक बंद कर दिया गया। जब गणेश चंद्रा ने निर्मल अग्रवाल (मैनेजर) से संपर्क कर आपत्ति दर्ज की, तो उसे उक्त दोनों द्वारा गालियां दी गईं और जान से मारने की धमकी दी गई। इस मामले में बाराद्वार पुलिस ने धारा 296 (शांति भंग करना), 3(5) और 351(2) (आपराधिक बल) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया।

तीसरे मामले मे रिजर्व फॉरेस्ट में अवैध सड़क निर्माण

सबसे गंभीर मामला बंसल बंधुओं द्वारा रिजर्व फॉरेस्ट के भीतर अवैध रूप से सड़क निर्माण का सामने आया है। बिना किसी वन विभागीय अनुमति के जंगल के अंदर से डोलोमाइट परिवहन करने के लिए सड़क बनवा दी गई। बताया जा रहा है कि पंचायत से अनुमति लेकर काम किया गया, लेकिन यह वन अधिनियम 1927 और वन संरक्षण अधिनियम 1980 का खुला उल्लंघन है, क्योंकि ग्राम पंचायत को रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि पर सड़क निर्माण की अनुमति देने का कोई अधिकार नहीं है। जब वन विभाग को इस घपले की भनक लगी, तो DFO ने स्वयं मौके पर पहुंचकर JCB से सड़क को खुदवा दिया। किंतु अब बड़ा सवाल यह है कि,क्या सिर्फ सड़क को खोद देने से जंगल में पेड़ों की अवैध कटाई और खनिज परिवहन जैसे गंभीर अपराध माफ हो जाएंगे?

क्या डोलोमाइट खनन घोटाले में अन्य लोगों की संलिप्तता की जांच होगी?

जंगल की भूमि पर अवैध कब्जे और सड़क निर्माण पर FRA और पर्यावरणीय नियमों के तहत कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए राजस्व, खनिज एवं वन विभाग की संयुक्त कमेटी गठित की जाएगी? बंसल बंधुओं पर एक के बाद एक आपराधिक शिकंजा कसता जा रहा है। FIR, DFO की कार्रवाई और स्थानीय लोगों की शिकायतों से साफ हो गया है कि मामला केवल व्यवसायिक मतभेद का नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर वन एवं खनिज कानूनों के उल्लंघन का है। यदि अब भी प्रशासन ने सख्ती नहीं दिखाई, तो भविष्य में ऐसे मामलों से वन संपदा और ग्रामीण सुरक्षा दोनों को भारी नुकसान हो सकता है।


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