WhatsApp Image 2025-08-11 at 1.25.45 PM
previous arrow
next arrow
Uncategorized

32/8 पर अब कलेक्टर ही कर सकते है कार्यवाही !!!!! कलेक्टर सर से ही है अब उम्मीद !!!! गरीबो के लिए सैकड़ो नियम कानून और रईसो.. रसूखदारों.. एप्रोच वालों .. राजनैतिक पैठ रखने वालों को के लिए कोई कानून नहीं !!!!! आखिर राजस्व विभाग किसकी राह देख रहा है क्या होंगी कोई भी कार्यवाही ????? प्रशासन के इसी शांत रवैये की वज़ह से पूरा एरिया दीमक की तरह चाट दिए है यें जमीन कारोबारी !!!!! क्या नहीं होंगी कोई भी कार्यवाही रसूखदारों पर !!!! जिला प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली से इसी तरह बच जाते है हर बार यें रसूखदार !!!! 32/8 का नामांतरण डायवर्सन सब कुछ फर्जी है हीरालाल सिदार फिर फागुलाल उसके बाद पी जी इंटरप्राइजेज प्रमोद कुमार अग्रवाल के नाम इस आदिवासी जमीन का हो जाना किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं है !!!! पैसों के लालच में आदिवासी जमीन की अवैध खरीद बिक्री का चौंकाने वाला मामला…!!!! बताया जा रहा है पटवारी ठाकुर की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है यें पटवारी कुसमुरा निवासी है !!!!!पुसौर नावापाली का यही मामला नहीं अगर खंगाला जाये तो मेडिकल कालेज. बिंजकोट. एकताल. व अन्य जगहों के आदिवासी जमीन का यही हाल है !!!!! कलेक्टर नें इस जमीन के फर्जी नामांतरण डायवर्सन के जाँच के आदेश भी दिए थे !!!!! अब देखना है राजस्व विभाग इस ओर क्या कार्यवाही करता है !!!!!

साकेत पाण्डेय.... 7869475276...

WhatsApp Image 2026-01-07 at 3.07.06 PM
previous arrow
next arrow
WhatsApp Image 2025-08-11 at 1.25.45 PM
previous arrow
next arrow
News of Mirror

 

जिला प्रशासन के पास गरीबो के लिए सैकड़ो नियम कानून होते है अगर उन्हें किसी काम के लिए अपनी आदिवासी जमीन बेचनी हो तो उन्हें सैकड़ो अनुमति लगती है वही अगर किसी रईसो.. रसूखदारों.. एप्रोच वालों .. राजनैतिक पैठ रखने वालो को ऐसी किसी भी नियम की जरुरत नहीं पडती उनका काम पटवारी RI सब फर्जी तरीके से कर देते है !!!!

जब सब रास्ते बंद हो जाते है तब लोग कलेक्टर का दरवाजा खटखताते है अब यही मंजर 32/8 के साथ हो रहा है अब तो कलेक्टर सर ही कार्यवाही करेंगे।।।।

अब तो शहर के एक स्थानीय प्रसिद्द अख़बार नें इस मामले को उठाया है क्या जिला प्रशासन अब करेगा कार्यवाही !!!! जिला प्रशासन के इसी शांत व्यवहार की वजह से इन भूमि कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद है!!!!! इस पूरे एरिया के आदिवासी जमीन को दीमक की तरह चाट दिए है !!!!

32/8 का नामांतरण डायवर्सन सब कुछ फर्जी है हीरालाल सिदार फिर फागुलाल उसके बाद पी जी इंटरप्राइजेज प्रमोद कुमार अग्रवाल के नाम इस आदिवासी जमीन का हो जाना किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं है !!!! पैसों के लालच में आदिवासी जमीन की अवैध खरीद बिक्री का चौंकाने वाला मामला…!!!! बताया जा रहा है पटवारी ठाकुर की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है यें पटवारी कुसमुरा निवासी है !!!!!पुसौर नावापाली का यही मामला नहीं अगर खंगाला जाये तो मेडिकल कालेज. बिंजकोट. एकताल. व अन्य जगहों के आदिवासी जमीन का यही हाल है !!!!! कलेक्टर नें इस जमीन के फर्जी नामांतरण डायवर्सन के जाँच के आदेश भी दिए थे !!!!! अब देखना है राजस्व विभाग इस ओर क्या कार्यवाही करता है !!!!!

जमीन खरीद_बिक्री के इस मामले में पहले ही पंजीयन निरस्त कर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की जानी थी,परन्तु उसे नजरअंदाज कर राजस्व कर्मियों ने आपराधिक सांठ_गांठ कर हर बार अवैध खरीद बिक्री में सहयोग किया..

 

रायगढ़/पुसौर_यदि आप राजनीतिक रसूख रहते हों और आपके पास राजस्व विभाग के बेईमान कर्मचारियों को खरीदने की क्षमता हो तो आप जमीन की अवैध खरीद बिक्री में संलिप्त होकर कम समय में अधिक से अधिक पैसा आसानी से कमा सकते हैं।ऐसा ही कुछ रायगढ़ शहर के निकटतम ग्राम नवापाली तहसील पुसौर में स्थित भूमि खसरा नंबर 32/8 से जुड़ा मामला है। जो बहुत ही रहस्यमयी और आश्चर्यजनक है।

 

स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार यह भूमि पहले उनके गांव के एक गरीब भूमिहीन आदिवासी हीरालाल सिदार के पूर्वजो को शासन के द्वारा कमाने खाने के लिए आबंटित की गई थी। जिसे कानूनी तौर पर बिना किसी सक्षम न्यायालय या कलेक्टर के अनुमति के खरीदना और बेचना पूर्णतः प्रतिबंधित था।

परंतु यह जमीन आश्चर्यजनक ढंग से महज एक अवैध डायवर्शन के आधार पर वर्ष 2012_2014 के बीच एक स्थानीय स्कूल कारोबारी फागू लाल सिंह पिता बिहारी लाल निवासी छोटे अतर मुड़ा जाति सामान्य के नाम पर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री हो गई।। ध्यान देने योग्य बात यह है कि खसरा नंबर 32/8 जो कि आबंटित आदिवासी भूमि थी,इसका व्यवसायिक परिवर्तन(डाईवर्षन) कैसे किया गया??इस अवैधानिक कृत्य में किस राजस्व सरकारी अधिकारी और कर्मचारी की भूमिका थी,उसे जांचा क्यों नहीं गया? यही नहीं पहले तो एक शासकीय आबंटित आदिवासी भूमि का व्यवसायिक परिवर्तन गलत तरीके से किया गया,फिर बिना उचित जांच और सक्षम न्यायालय/ कलेक्टर की अनुमति के इस भूमि का अवैध पंजीयन और नामांतरण एक सामान्य जाति के खरीददार फागू लाल सिंह के नाम कैसे कर दिया गया??

*आपको पूरी तरह से चौका देगी खसरा नंबर 32/ 8 भूमि के अवैध खरीद बिक्री की कहानी…*

 

 

इन तमाम सवालों के बीच पिछले कई बार ग्राम नावापाली की इस विवादित भूमि 32/8 की कहानी मीडिया और स्थानीय ग्रामीणों के माध्यम से जिला प्रशासन के संज्ञान के लाई गई। परंतु इस आपराधिक कृत्य में संलिप्त लोगों यहां तक कि क्रेता फागु लाल सिंह के खिलाफ कभी कोई कार्यवाही नहीं की गईं न ही इस 170 (ख) से जुड़े इस अवैध भूमि पंजीयन को निरस्त किया गया। इधर सवाल पूछे जाने पर भूमि के निवर्तमान स्वामी फागुलाल सिंह मीडिया कर्मियों को या तो मैनेज करता रहा या फिर गुरु द्रोण स्कूल समीति के लिए भूमि खरीदने की बात कहता रहा। उसके अनुसार यह भूमि स्कूल बिल्डिंग और छात्रावास बनाने के लिए आदिवासी भूमि स्वामी के सहमति से खरीदी गई हम जिसे वह कभी बेचेगा नहींं।

परंतु कुछ साल बाद ही उक्त स्कूल संचालक ने इस भूमि को पुनः एक रसूखदार भूमि कारोबारी प्रमोद कुमार अग्रवाल को बेच दी। वहीं अब तक इस आदिवासी जमीन को एक ओर फागुलाल सिंह मेरी जमीन बताने के बाद जिस रसूखदार भूमि कारोबारी प्रमोद कुमार अग्रवाल को बेची है। वह इस भूमि को पुनः चार पांच टुकड़े कर ऊंची कीमत बेचने की फिराक में लगा है। जिसके लिए इस विवादित भूमि पर डब्लमेंट का कार्य भी अवैध तरीके से किया जा रहा है।

*पूर्व में और वर्तमान में संलिप्त पटवारी RI की मिली भगत पर क्या राजस्व विभाग उनके खिलाफ कोई कार्यवाही करेगा??*

स्थानीय लोगों की माने तो इस चर्चित रसूखदार भूमि कारोबारी प्रमोद कुमार अग्रवाल की धाक इतनी मजबूत है कि इसके द्वारा शहर और जिले के विभिन्न क्षेत्रों जिनमें टी वी टावर अतरमुड़ा. एकताल,बिंजकोट,गोपालपुर, जामगांव, टारपाली, मेडिकल कालेज के आसपास, पंडरीपानी हर जगह बड़े पैमाने (कई एकड़ों)में आदिवासियों और गरीब भूमिहीन ग्रामीणों को मिली शासकीय आवंटित जमीन को बिना कलेक्टर की अनुमति के सीधे खरीद लिया है।

हम बात कर रहे है यहाँ ग्राम नवा पाली की आबंटित आदिवासी भूमि 32/8 की, यें जमीन प्रारम्भ के किसी हीरालाल सिदार के नाम मे थीं इसका रकबा नंबर खसरा नंबर 32/8 रकबा 0. 8090 लगभग दो एकड़ जमीन है ! फिर इस पर बोर्ड तो फागुलाल सिदार का लगा दिख रहा है। लेकिन ऑनलाइन रिकार्ड में इस भूमि का स्वामी किसी प्रमोद कुमार अग्रवाल को दिखाया जा रहा है।बकायदा यहाँ बोर्ड भी लगाया यें जमीन फागुलाल सिंह की है। इस 32/8 भूमि पर कभी फागुलाल एक स्कूल बनवा रहा था. अब हीरालाल की जमीन बिना कलेक्टर परमिशन या सक्षम न्यायालय के अनुमति के ही फागुलाल से प्रमोद कुमार

अग्रवाल की कैसे और कब हो गई ?? इतना ही नहीं अब अब भुइया ऐप मे जाकर देखिए यें जमीन किसके नाम दिखा रही है! सवाल यह है कि आखिर यें सब चमत्कार होता कैसे है?? वाकई मे माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बात सत्य साबित होती है की RI और पटवारी भगवान होते है. यें भगवान ऐसा चमत्कार करते है की अच्चे से अच्छा आदिवासी जमीन सामान्य रसूखदार भूमि कारोबारी की हो जाती है! यह बड़ा पेचीदा मामला नहीं है सिम्पल है !!!! इस भूमि का डायवर्सन कैसे हुआ कौन कौन से लोग सम्मिलित है इसमे क्या सभी के खिलाफ कार्यवाही होंगी?

इस सवाल पर रायगढ़ SDM महेश शर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा है कि साक्ष्यों के आधार पर शिकायत की गई तो निश्चित तौर कड़ी कार्यवाही होगी। साथ ही कलेक्टर रायगढ़ मयंक चतुर्वेदी के संज्ञान में प्रकरण को लाकर इस आबंटित आदिवासी जमीन की अवैध खरीद बिक्री में अब तक संप्लित सभी लोगों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज करवाया जायेगा।

संबंधित मामले में जहाँ शिकायत के बाद कार्यवाही का आश्वासन SDM सर के द्वारा दिया गया वहां पर होना यह चाहिए था कि इस तरह के संवेदनशील और जमीन के गैरकानूनी खरीद बिक्री मामले में प्रशासन को स्वत: संज्ञान लेकर जांच करवाना था। इसके साथ ही दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जानी थी।

इस मामले मे पटवारी ठाकुर की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है यें पटवारी कुसमुरा गांव का है और इस तरह के चमत्कारिक कार्य मे सिद्धि प्राप्त है !!!!!!

 

*अगले अंक मे इस भूमि जुड़े मामले का ताजा अपडेट जरूर पढ़िएगा….*


News of Mirror
WhatsApp Image 2025-08-11 at 1.25.45 PM
previous arrow
next arrow

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!