संघर्ष, शिक्षा और समाज सेवा: रामचंद्र शर्मा की पहचान…..
साकेत पाण्डेय... 7869475276...


गरीबी, संघर्ष, सामाजिक चुनौतियाँ और कड़ी प्रतिस्पर्धा—ये जीवन के वे अध्याय हैं जिन्हें रायगढ़ के शिक्षाविद एवं समाजसेवी रामचंद्र शर्मा ने बहुत करीब से जिया है। सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच शुरू हुआ उनका जीवन-सफर आज शिक्षा, समाज सेवा और जनजागरण के क्षेत्र में एक अलग पहचान बना चुका है।
रायगढ़ शहर के बैकुंठपुर क्षेत्र में निवासरत तथा बचपन रायगढ़ की पुरानी बस्ती में बिताने वाले रामचंद्र शर्मा ने विपरीत परिस्थितियों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने शिक्षा, आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर मेहनत को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। यही संकल्प उन्हें प्रशासनिक सेवा तक ले गया, जहाँ उन्होंने थाना प्रभारी (टीआई) के रूप में अपनी सेवाएँ दीं।

हालाँकि, एक सुरक्षित और प्रतिष्ठित सरकारी पद पर रहते हुए भी उनका मन समाज और शिक्षा के क्षेत्र में कुछ अलग करने के लिए प्रेरित करता रहा। अंतत: उन्होंने थाना प्रभारी का पद छोडक़र शिक्षा और जनसेवा का मार्ग चुना। यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने विश्वास और उद्देश्य को प्राथमिकता दी। आज वे जिले में एक प्रसिद्ध शिक्षाविद, मोटिवेशनल स्पीकर और समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं तथा अनेक सामाजिक और जनहित के कार्यों से जुड़े हुए हैं।
अपने जन्मदिन की पूर्व संध्या पर हुई विशेष बातचीत में रामचंद्र शर्मा ने कहा, “मेरा सफर अभी शुरू हुआ है। जीवन में चुनौतियाँ कभी समाप्त नहीं होतीं। अंतिम साँस तक मनुष्य को संघर्ष करते हुए समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक योगदान देने का प्रयास करते रहना चाहिए।”
उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय शिक्षा, मेहनत और सकारात्मक सोच को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएँ। उनका मानना है कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल व्यक्तिगत उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
रामचंद्र शर्मा की जीवन यात्रा इस बात का उदाहरण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और संकल्प दृढ़ हो, तो अभाव और कठिनाइयाँ भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। संघर्ष, शिक्षा और समाज सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज उन्हें रायगढ़ की प्रेरणादायी हस्तियों में शामिल करती है।













