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महाजेनको की खनन सहयोगी कंपनी अडानी द्वारा ग्राम पंचायत सराईटोला के आश्रित गाँव मुड़ागांव फॉरेस्ट लैंड (पतरा क्षेत्र) में आज से ब्लास्टिंग गतिविधियों की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है…..लंबे समय से प्रस्तावित इस खनन प्रोजेक्ट के चलते इलाके में औद्योगिक हलचल तेज हो गई है, लेकिन दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीण अब भी अपनी कई बुनियादी मांगों के समाधान का इंतजार कर रहे हैं……

साकेत पाण्डेय.... 7869475276.....

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महाजेनको की खनन सहयोगी कंपनी अडानी द्वारा ग्राम पंचायत सराईटोला के आश्रित गाँव मुड़ागांव फॉरेस्ट लैंड (पतरा क्षेत्र) में आज से ब्लास्टिंग गतिविधियों की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है। लंबे समय से प्रस्तावित इस खनन प्रोजेक्ट के चलते इलाके में औद्योगिक हलचल तेज हो गई है, लेकिन दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीण अब भी अपनी कई बुनियादी मांगों के समाधान का इंतजार कर रहे हैं।

 

ग्रामीणों को नहीं मिला कथित 7 करोड़ का मुआवज़ा

 

मुड़ागांव क्षेत्र के पतरा जंगल—जहां छोटे झाड़ों और पेड़ों पर निर्भर रहकर स्थानीय परिवार लंबे समय से जीविकोपार्जन करते आए हैं—के लिए करीब 7 करोड़ रुपए के मुआवज़े की चर्चा तो महीनों से चल रही है, लेकिन ग्रामीणों को आज तक कोई वास्तविक भुगतान नहीं हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि खनन शुरू होने से पहले उचित मूल्यांकन, सर्वे और भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, परंतु अब ब्लास्टिंग शुरू होने के बावजूद भी यह वादा अधूरा ही नजर आ रहा है।

 

तेज खनन से भू-जल स्तर गिरने की आशंका

 

ब्लास्टिंग और खनन गतिविधियों के बढ़ने के साथ ही क्षेत्र में भू-जल स्तर में तेज गिरावट की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि पतरा के आसपास पहले ही पानी की उपलब्धता सीमित है। खनन से आसपास के कुओं, हैंडपंपों और कृषि भूमि के लिए जलसंकट खड़ा हो सकता है।

वन क्षेत्र के पतले जंगल पहले ही दबाव में हैं; अब कंपनियों की भारी मशीनरी और गहरे खनन से जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।

 

निजी जमीन का सर्वे अब तक अधूरा

 

सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक यह है कि मुड़ागांव के निजी भूमि का सर्वे अभी तक शुरू ही नहीं हुआ। कई ग्रामीणों ने बताया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आधी-अधूरी है और उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि उनकी कितनी जमीन प्रभावित होगी, क्या दर तय होगी और भुगतान कब होगा।

भूमि के अस्पष्ट रिकॉर्ड और सर्वे के बीच ब्लास्टिंग शुरू होना ग्रामीणों में असंतोष और अविश्वास दोनों बढ़ा रहा है।

 

 

खनन कंपनी और प्रशासन पर उठ रहे सवाल

ग्रामीण संगठनों ने सवाल उठाया है कि जब मुआवज़े, जल-प्रभाव अध्ययन और जमीन के सर्वे जैसी ज़रूरी प्रक्रियाएँ अधूरी हैं, तो त्वरित रूप से ब्लास्टिंग शुरू करने की क्या मजबूरी थी?

स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि संवाद और पारदर्शिता के अभाव में स्थितियाँ भविष्य में तनावपूर्ण हो सकती हैं। मीडिया के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई है कि वह तत्काल ग्रामीणों की समस्याएं सुने और समाधान की ठोस दिशा में कदम उठाए।

 

ग्रामीणों की अपेक्षा – न्यायपूर्ण प्रक्रिया और पारदर्शिता

 

मुड़ागांव के लोगों का कहना है कि वे विकास और औद्योगिक परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनके अधिकारों, मुआवज़े और भविष्य की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं—

 

तय मुआवजा राशि का पारदर्शी भुगतान

 

निजी भूमि का पूर्ण और निष्पक्ष सर्वे

 

जलस्रोत बचाने के लिए सुरक्षा उपाय

 

ब्लास्टिंग और खनन से उत्पन्न वातावरणीय प्रभाव का सही अध्ययन

 

विस्थापन होने पर पुनर्वास की स्पष्ट नीति

 

 

मुड़ागांव क्षेत्र में खनन गतिविधियों की रफ्तार अब तेज हो चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और कंपनी लोगों के मुद्दों का समाधान कितनी गंभीरता और संवेदनशीलता से करती है।


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