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मनीष देवांगन ने शांति विहार कॉलोनी के कोटवार भूमि शासकीय भूमि और शमशान की भूमि पर भी किया है कब्ज़ा — हीरालाल खड़िया ….. कांग्रेस के शासन के समय का है मामला… कांग्रेस के कार्यकाल मे बहुत से कारनामें है मनीष देवांगन के जिसे हम धीरे धीरे अपने सुधि पाठको के लिए लेकर आएंगे…. भाग 2

साकेत पाण्डेय... 7869475276

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मनीष देवांगन ने शांति विहार कॉलोनी के कोटवार भूमि शासकीय भूमि और शमशान की भूमि पर भी किया है कब्ज़ा — हीरालाल खड़िया

जागरूक और सक्रिय अधिवक्ता कालिका पाण्डेय जी के बाईट के साथ…..सिविल कोर्ट के आदेश के विपरीत जाकर केलो विहार समिति की जमीन की बिक्री व नामांतरण वाले केस में एक पक्ष ने एसडीएम रायगढ़ से न्याय की उम्मीद नहीं होने की बात कहकर खरसिया में केस ट्रांसफर करा लिया है। जहां यह विवादित आदेश पारित करने वाले अफसर भी ट्रांसफर होकर गए हैं। तहसील से एसडीएम और कमिश्रर कोर्ट तक पहुंच चुके इस केस में अब ईओडब्ल्यू ने भी जांच के लिए कहा है,,,यह समाचार भी जल्द आएगा हमारे सुधि पाठको के लिए….

 

अतरमुड़ा क्षेत्र के पूर्व सरपंच हीरालाल खड़िया ने न्यूज़ ऑफ़ मिरर को बताया की शांति विहार कॉलोनी की शासकीय जमीन खसरा नंबर 154 – 155 को नदी

किनारे अतिक्रमण किया है ये शासकीय भूमि थीं नदी किनारे इसको शमशान बनाने के लिए रखे थे।चार पांच साल पूर्व कांग्रेस के शासनकाल मे ये कृत्य मनीष देवांगन ने किया। वही खसरा नंबर 222 को भी दीवाल बाउंड्री कर तार से घेर दिया है।
इतना अतिक्रमण करने के बाद भी अभी तक कोई भी कार्यवाही इस ओर नहीं होती है तो इनके हौंसले खुद ब खुद बढ़ जाते है।

मेडिकल कॉलेज अतरमुड़ा मार्ग के तिराहा से लगा हुआ है गंगा स्मार्ट नर्सिंग होम उससे महज 100 मीटर की दूरी पर है शांति विहार कॉलोनी है। इस कॉलोनी मे बहुत ही शानदार वातावरण है लेकिन इस कॉलोनी मे एक बात सामने आ रही है आसपास के रहवासियों और विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी की माने तो भू कारोबारी मनीष देवांगन यहाँ भी लगभग डेढ़ दो एकड़ कोटवारी शासकीय वा शमशान की भूमि 154 155 222 पर कब्ज़ा किया है। मनीष ने यह काला कारनामा कांग्रेस कार्यकाल मे किया था. मनीष को कांग्रेसी नेता माना जाता है इसी रसूख के दम पर मनीष ने यहाँ पर ये काला खेल किया है. राजस्व विभाग तत्कालीन पटवारी से जानकारी ले तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है। पटवारी अगर इसके रसूख के दबाव मे आकर या माता लक्ष्मी के बोझ तले दबकर कुछ नहीं बोलता है तो इस जगह की नपाई करवाकर राजस्व विभाग संतुष्टि कर सकता है। एक ओर शासन को सरकारी प्रयोजनों के लिए जमीन नहीं मिल रहा है इधर भू माफिया छोटे बड़े झाड के जंगल. कोटवारी भूमि. शासकीय भूमि पर नित्य बेखौफ़ अतिक्रमण कर रहे है। मीडिया के द्वारा खबर उठाने पर भी कार्यवाही नहीं कर इनके हौंसले बढ़ाने मे जिला प्रशासन मस्त है। लगातार मनीष देवांगन के खिलाफ कुछ ना कुछ प्रकाशित हो रहा है उसके बाद भी राजस्व विभाग अगर मौन साध रही है तो इसका क्या अंदाजा लगाया जाए।ü


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