DFO जांजगीर चाम्पा हिमांशु डोंगरे के बाइट के साथ कल नानक बंसल और मुकेश बंसल की खबर का होगा प्रकाशन….नानक बंसल और मुकेश बंसल पर कब ठोस कार्यवाही करेगा जांजगीर चाम्पा वन विभाग !!!! नानक बंसल मुकेश बंसल के अवैध निर्माण पर छोटी सी कार्यवाही कर पल्ला नहीं झाड सकता वन विभाग !!!!!!! जिस खदान तक पहुंचने के लिए बंसल बंधुओं ने अवैध रूप से सड़क निर्माण कराया था, उस पर वन विभाग ने न केवल तोड़फोड़ का आदेश जारी किया, बल्कि उस पर तत्काल अमल करते हुए पूरी सड़क को खोद डाला है !!!! छितापड़रिया ग्राम की आरक्षित वन भूमि पर गुरुश्री इंडस्ट्रीज प्रा. लि. द्वारा खदान तक पहुंच मार्ग के नाम पर अवैध रूप से सड़क बना दी गई थी !!!!! वन सरक्षण अधिनियम 1980 के तहत होनी चाहिए थी कार्यवाही….
साकेत पाण्डेय.... 7869475276....



हिमांशु डोंगरे जांजगीर चाम्पा DFO से हुई बातचीत का कल NEWS OF MIRROR मे होगा प्रकाशन…. आप हमारे साथ बने रहिये….
रायगढ़ के ढिमरापुर निवासी मुकेश बंसल और नानक बंसल पर खदान भूमि के नाम पर 11 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप पहले ही दर्ज हो चुका है, इसमे उन्हें अग्रिम ज़मानत भी मिल गई है वही दूसरे प्रकरण में वन विभाग की छोटी सी कार्यवाही कर अपने दायित्वों से इतिश्री कर लिया है । जिस खदान तक पहुंचने के लिए बंसल बंधुओं ने अवैध रूप से सड़क निर्माण कराया था, उस पर वन विभाग ने न केवल तोड़फोड़ का आदेश जारी किया, बल्कि उस पर तत्काल अमल करते हुए पूरी सड़क को खोद डाला है।

वन भूमि पर अवैध कब्जा कर बनाई गई थी सड़क
छितापड़रिया ग्राम की आरक्षित वन भूमि पर गुरुश्री इंडस्ट्रीज प्रा. लि. द्वारा खदान तक पहुंच मार्ग के नाम पर अवैध रूप से सड़क बना दी गई थी। इसे वैध दिखाने के लिए सार्वजनिक उपयोग का हवाला देते हुए वन विभाग से अनुमति लेने की कोशिश की गई, लेकिन जांच में सच्चाई सामने आते ही विभाग ने 23 मई 2025 को दी गई अनापत्ति को रद्द कर दिया।

वनमंडलाधिकारी (DFO) जांजगीर-चांपा द्वारा जारी आदेश के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और अवैध सड़क को पूरी तरह से खोद कर नष्ट कर दिया। इससे यह स्पष्ट संकेत गया है कि वन भूमि के अतिक्रमण को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब जब वन विभाग ने सड़क को अवैध घोषित कर उसे खत्म कर दिया है….
इस मामले ने भू-माफियाओं और कथित उद्योगपतियों के अवैध कृत्यों की परतें खोल दी हैं। वन विभाग की त्वरित कार्रवाई न केवल उदाहरण बन सकती है, बल्कि अन्य विभागों के लिए भी चेतावनी है कि लापरवाही और मिलीभगत की स्थिति में अब कार्रवाई तय है।
धारा 1980 के तहत होनी चाहिए कार्यवाही
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वनों का संरक्षण करना, वनों की कटाई को रोकना, और गैर-वन उपयोगों के लिए वन भूमि के उपयोग को विनियमित करना.
क्या है प्रावधान….वन भूमि को गैर-वन उपयोगों के लिए स्थानांतरित करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है. वन भूमि का उपयोग केवल उन उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है जो राष्ट्रीय हित में हों….वन भूमि के नुकसान की भरपाई के लिए वनीकरण और पुनर्वनीकरण गतिविधियां अनिवार्य हैं. इस अधिनियम का उल्लंघन करने वालो पर अधिनियम के तहत दंड का भी प्रावधान है… जो वन विभाग नें बंसल बंधुओ पर अधिरोपित नहीं की है…













