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ग्रीन पार्क के मालिकों नें सांठ गांठ कर सभी को ठगा हैं !!!!! कॉलोनी मेडिकल कालेज के पास और EWS की जमीन कही और.. ग्रीन पार्क कॉलोनी के मालिकों का जबरदस्त काला खेल !!!!!!! टाउन एन्ड कंट्री प्लानिंग से सांठगाँठ कर हुआ हैं काला खेल !!!!! 94 मे से 70 प्लॉट बिक चुके हैं !!!!! बिल्डर ने ईडब्ल्यूएस के लिए पुसौर तहसील के ग्राम नावापाली में खसरा नंबर 133/2 रकबा 0.297 हे. सौंपी है !!!!! यह जमीन कॉलोनी से 10 किमी दूर केलो नदी किनारे है. जमीन भले ही शासन को दी गई हो लेकिन यह अभिषेक पिता कैलाश अग्रवाल के नाम पर ही दर्ज है !!!!!!

साकेत पाण्डेय... 7869475276....

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News of Mirror

 

 

कॉलोनी मेडिकल कालेज के पास और EWS की जमीन कही और.. ग्रीन पार्क कॉलोनी के मालिकों का जबरदस्त काला खेल !!!!!!! टाउन एन्ड कंट्री प्लानिंग से सांठगाँठ कर हुआ हैं काला खेल !!!!! 94 मे से 70 प्लॉट बिक चुके हैं !!!!! बिल्डर ने ईडब्ल्यूएस के लिए पुसौर तहसील के ग्राम नावापाली में खसरा नंबर 133/2 रकबा 0.297 हे. सौंपी है !!!!! यह जमीन कॉलोनी से 10 किमी दूर केलो नदी किनारे है. जमीन भले ही शासन को दी गई हो लेकिन यह अभिषेक पिता कैलाश अग्रवाल के नाम पर ही दर्ज है!!!!!!

 

शहर मे भू माफियाओ का मकड़जाल बुरी तरह फैला हुआ हैं.. कोई भी कही पर की भी जमीन को हथिया कर पटवारी आर आई से सांठ गाँठ कर कही पर भी लें रहा हैं आदिवासियों की जमीन को भी बुरी तरह हड़पा जा रहा हैं साथ ही साथ शासकीय भूमि को भी हड़पने से बाज नहीं आ रहे हैं… ऐसा ही एक मामला ग्रीन पार्क कॉलोनी मे देखने को मिल रहा हैं…

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बड़े अतरमुड़ा के ग्रीन पार्क कॉलोनी के अंदर पर्याप्त जमीन थी लेकिन कॉलोनाइजर ने पुसौर तहसील के नावापाली में जमीन दी। मेडिकल कॉलेज के ठीक सामने कैलाश अग्रवाल ने भी सालों पहले ग्रीन पार्क नामक कॉलोनी के लिए अनुमति ली थी। 94 प्लॉट में से 70 प्लॉट बिक चुके हैं। कैलाश अग्रवाल पिता रामनिवास अग्रवाल निवासी जगतपुर ने बड़े अतरमुड़ा की भूमि 196, 198/1, 198/3, 198/4, 198/5, 208/1, 211 और 213 कुल खनं 8 रकबा 8.372 हे. को कॉलोनी और व्यावसायिक निर्माण के लिए डायवर्सन कराया था। 25 अगस्त 2008 को डायवर्सन किया गया। इसमें 2013 तक कोई निर्माण नहीं किया गया।

 

निजी कॉलोनियों में कमजोर आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास बनाने जमीन छोडऩे कर नियम है। अफसरों ने बिल्डरों के साथ मिलकर इस नियम की अपनी सुविधा के हिसाब से व्याख्या की है। किसी ने खेतों के बीच जमीन दे दी तो किसी से दस किमी दूर !!!!! बिल्डर ने ईडब्ल्यूएस के लिए पुसौर तहसील के ग्राम नावापाली में खसरा नंबर 133/2 रकबा 0.297 हे. सौंपी है !!!!! यह जमीन कॉलोनी से 10 किमी दूर केलो नदी किनारे है !!!!जमीन भले ही शासन को दी गई हो लेकिन यह अभिषेक पिता कैलाश अग्रवाल के नाम पर ही दर्ज है !!!!!  9 अक्टूबर 2013 को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने खसरा नंबर 198/5 रकबा 1.1978 हे. पर विकास अनुज्ञा जारी की। इसके बाद 1 जुलाई 2014 को एसडीएम ने कॉलोनी विकास की अनुमति जारी की। इसके बाद कैलाश अग्रवाल और उनके पुत्र अभिषेक अग्रवाल ने

29 नवंबर 2022 को रेरा में ग्रीन पार्क कॉलोनी का पंजीयन कराया। कॉलोनी के अंदर ईडब्ल्यूएस के लिए जमीन दी जानी चाहिए थी लेकिन टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में सांठगांठ करके एप्रूवल ले लिया। बिल्डर ने ईडब्ल्यूएस के लिए पुसौर तहसील के ग्राम नावापाली में खसरा नंबर 133/2 रकबा 0.297 हे. सौंपी है। यह जमीन कॉलोनी से 10 किमी दूर केलो नदी किनारे है। जमीन भले ही शासन को दी गई हो लेकिन यह अभिषेक पिता कैलाश अग्रवाल के नाम पर ही दर्ज है।

कॉलोनी में क्यों नहीं दी जमीन

बिल्डर ने रायगढ़ तहसील में कॉलोनी बनाई लेकिन पुसौर तहसील के नावापाली के अंदर केलो नदी के किनारे ईडब्ल्यूएस जमीन दी। किसी भी अधिकारी ने इस पर आपत्ति नहीं जताई। जहां जमीन मिली है, वहां कोई निर्माण तक नहीं किया जा सकता। वहां कमजोर आय वर्ग के लिए आवास नहीं बनाया जा सकता। ग्रीन पार्क कॉलोनी से

लगकर कैलाश अग्रवाल की और भी जमीन है लेकिन अफसरों ने बिल्डर का ही साथ दिया। ग्रीन पार्क कॉलोनी को डेवलप करने की अवधि 31 दिसंबर 2025 तक थी जो एक साल बढ़ा दी गई है क्योंकि मौके पर कोई भी काम नहीं हुआ है। जबकि 94 प्लॉट में से 70 बिक चुके हैं।

क्यों जमा नहीं किया जा रहा हैं रिपोर्ट

उक्त भूमि के मामले मे यहाँ पर आर आई पटवारी नें एक रिपोर्ट तैयार किया हैं.. इस रिपोर्ट को जब तहसील कार्यालय मे जमा कराया जायेगा तो सब कुछ सामने आ जायेगा… कितने आदिवासी जमीन पर कब्ज़ा हुआ हैं कितने आदिवासियों की भूमि पर आने जाने के रास्ते को रोका जा रहा हैं… और कितनी शासकीय भूमि हड़पी जा रही हैं….


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