विनाश के काले बादल मुड़ागांव पर बुरी तरह छाए हुए है….रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक के मुड़ागांव और सरैटोला गांव के सघन जंगलों में 26 और 27 जून को अदानी समूह द्वारा संचालित कोयला खदान परियोजना के लिए लगभग 2500 पेड़ों की कटाई कर दी गई…..सूत्रों से यह जानकारी मिल रही है गारे– पेलमा सेक्टर कोल ब्लॉक परियोजना के लिए एवं महाराष्ट्र की सरकारी बिजली कंपनी महाजेंको (MAHAGENCO) के लिए अदानी समूह द्वारा संचालित की जा रही है…..मुड़ागांव के बाद सराईटोला में भी अडाणी का वन संहार ग्रामीणों के विरोध से बचने तड़के 4 बजे चलाया गया बिजली भी की गई गुल हाइड्रा…..हाइड्रा से कुचलकर पेड़ों को किया दफन, हरियाली की जगह अब समतल जमीन….
साकेत पांडेय.... 7869475276....


रायगढ़। मुड़ागांव के बाद अब सराईटोला में भी अडाणी का वन संहार शुरू हो गया। ग्रामीणों के विरोध से बचने कंपनी के अफसरों के इशारे पर पुलिस व प्रशासन की मदद से तड़के 4 बजे कार्रवाई शुरू की गई और जंगल में पेड़ों को काटने के बाद हाइड्रा चलाकर वो हरियाली और प्राकृक्तिक वनोपज भी दफन कर दी गई। जिस पर क्षेत्र के आदिवासी अपनी जीविकोपार्जन करते थे। महाजेनको की कोल माइंस के लिए अडाणी कंपनी द्वारा एमडीओ के रूप में जिले में वनसंहार जारी है। मुडागांव में हजारों पेड़ो की बलि देने के बाद ग्रामीणों का पनपा आक्रोश शांत भी नहीं हुआ था कि दो दिन बाद ही अडाणी ग्रुप ने सराईटोला में भी कोयले के लिए प्राकृक्तिक हरियाली छिननी शुरू कर दी।

मुडागांव में प्रभावित ग्रामीण लगातार आंदोलन कर रहे हैं। वहीं अडाणी कंपनी के लिए सराईटोला में भी तड़के 4 बजे मिशन वनसंहार शुरू हो दिया। इस दौरान छोटे बड़े और मझोले हजारों पेडों को काटकर जमींदोज कर दिया गया और उस पर हाइड्रा चलाकर हरे भरे जंगल की जगह समतलीकरण कर दिया गया।

मुड़ागांव व सराइटोला के पेड कटाई मामले में भी ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सहमति के बिना यह कटाई शुरू की गई है। एक आदिवासी महिला ने कहा, हमारी ग्राम सभा की राय को नजरअंदाज किया गया। हमें न तो सूचना दी गई, न ही हमारी बात सुनी गई। आदिवासी समुदाय इस घटना को अपनी संस्कृति और आजीविका पर हमला मान रहा है। उनका कहना है कि जंगल उनके जीवन का आधार हैं, और इन्हें काटने से उनकी आजीविका, जल स्रोत और पारंपरिक प्रथाएँ खतरे में पड़ जाएंगे।

पांचवीं अनुसूची से प्रभावित क्षेत्र में ग्राम सभा की सहमति के बिना जंगलों की कटाई नहीं हो सकती। जंगलों पर आदिवासी समुदाय निर्भर होता है लेकिन इन सब सरकारी नियमों के बाद भी एसडीएम व डीएफओ के आदेश पर मुडागांव के रिजर्व फॉरेस्ट कम्पार्टमेंट 740 पी और 741 पी में वृक्षों की कटाई बीते 4 दिनों से जारी है। हरे भरे जंगल की कटाई से इस क्षेत्र के पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचाया जा रहा है, उसकी कोई भरपाई आने वाले कई सालों तक नहीं की जा सकेगी।

पीसीसी चीफ समेत कांग्रेस के आधा दर्जन विधायकों ने मुडागांव में दौरा कर प्रभावितों से मुलाकात की थी और अब इस मामले में भाजपा और अडाणी ग्रुप को घेरने के लिए छग विधनसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत भी तमनार के। मुड़ागांव पहुंच रहे हैं। महत सोमवार को ही पहुंचने वाले थे लेकिन किन्हीं कारणों से उनका यह दौरा अंतिम रूप नहीं ले सका।

कोल खनन के लिए अडाणी के अफसरों का रास्ता साफ हो सके, इसके लिए प्रशासन व पुलिस पूरा सहयोग कर रहा है। पुलिस ने गांव को छावनी बना रखा है। सुबह से ही पुलिस बल गांव की सीमा पर तैनात हो जाता है। जिससे आदिवासी समाज के लोग वनोपज के लिए जंगल की ओर भी नहीं जा पा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और जनचेतना के राजेश त्रिपाठी ने बताया कि ग्रामीणों को विरोध कुचलने और पेड़ों की कटाई के लिए कोई कसर नहीं छोडी जा रही है। मुडागांव में बिजली भी काट दी गई, ग्रामीणों ने काफी हो हंगामा मचाया तो एक फेस से बिजली दे दी गई। अफसरों द्वारा कोई सुनवाई ना होने से प्रभावित ग्रामीण लाचार है
रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक के मुड़ागांव और सरैटोला गांव के सघन जंगलों में 26 और 27 जून को अदानी समूह द्वारा संचालित कोयला खदान परियोजना के लिए लगभग 2500 पेड़ों की कटाई कर दी गई। सूत्रों से यह जानकारी मिल रही है गारे-पाम्ला सेक्टर कोल ब्लॉक परियोजना के लिए एवं महाराष्ट्र की सरकारी बिजली कंपनी महागेंको (MAHAGENCO) के लिए अदानी समूह द्वारा संचालित की जा रही है। पेड़ों की कटाई के दौरान लगभग 500 पुलिस बल और विशेष सुरक्षा दस्ते इलाके में तैनात किए गए है कटाई के विरोध में खड़े ग्रामीणों को विशेषकर महिलाओं को हटाने के लिए बल प्रयोग किया गया विरोध और गिरफ्तारियां से इस पूरे अभियान के दौरान लगभग 100 से अधिक ग्रामीणों को हिरासत में लिया गया, जिनमें महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और कांग्रेस विधायक विद्यावती सिदार भी शामिल थीं।
स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना और मुआवज़े के वनभूमि पर बुलडोज़र चला दिया गया कानूनी प्रक्रिया और विरोध
यह मामला पहले से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उनकी अनुमति के बिना ग्राम सभा की सहमति को फर्ज़ी तरीके से दिखाया गया, ताकि खनन कार्य को वैध ठहराया जा सके। “जंगल हमारा है, जीवन हमारा है” जैसे नारों के साथ ग्रामीणों ने अपने पारंपरिक वन अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया।
अदानी ग्रुप की तरफ से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं आया है
सरकार का दावा है कि “परियोजना राज्य और देश के ऊर्जा हित में है” और इसके बदले में प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) की योजना बनाई जा रही है।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग?
“हमने इस जंगल को बचपन से देखा है, इसमें हमारी आत्मा है। हम इसे कंपनियों के हवाले नहीं कर सकते,” – बिनेस्वरी भगत, स्थानीय आदिवासी महिला।
“हमारी ग्राम सभा की सहमति नहीं ली गई, फिर भी कंपनी आकर मशीन लेकर जंगल साफ कर करना चालू कर दिया। यह अन्याय है।” – राजा राम सिदार, ग्रामीण













