बहुत जल्द मनीष देवांगन पर गिर सकती है प्रशासनिक कार्यवाही की गाज….NEWS OF MIRROR अब परत दर मनीष देवांगन के हर मामले का करेगा खुलासा… आदिवासी जमीन पर पेट्रोल पम्प.. कॉलोनियों मे अतिक्रमण की हुई कोटवार जमीन… भू माफिया मनीष देवांगन की हुई बल्ले बल्ले… पूर्व तहसीलदार ने केलो विहार सोसाइटी की जमीन कर दी थी भूमाफिया के नाम….भू माफियाओ का आतंक समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा है..रायगढ़ राजस्व विभाग के अजब गजब कारनामें….. गजब का आदेश हुआ जारी…जमीन रायगढ़ की, आयुक्त ने जांच की जिम्मेदारी खरसिया एसडीएम को सौंपी….इओडब्ल्यू की हुई एंट्री…
साकेत पाण्डेय..... 7869475276....

भू माफिया मनीष देवांगन की हुई बल्ले बल्ले… पूर्व तहसीलदार ने केलो विहार सोसाइटी की जमीन कर दी थी भूमाफिया के नाम….भू माफियाओ का आतंक समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा है..रायगढ़ राजस्व विभाग के अजब गजब कारनामें….. गजब का आदेश हुआ जारी…जमीन रायगढ़ की, आयुक्त ने जांच की जिम्मेदारी खरसिया एसडीएम को सौंपी….इओडब्ल्यू की हुई एंट्री….
मनीष देवांगन के हरकत से समूचा राजस्व विभाग खफा है कभी भी मनीष देवांगन के खिलाफ कार्यवाही की गाज गिर सकती है. अब परत दर परत मनीष देवांगन के हर मामले का खुलासा न्यूज़ ऑफ़ मिरर मे होगा…
रायगढ़ का राजस्व विभाग चर्चा मे रहने का जुगाड़ जमा ही लेता आए दिन समाचार पत्रों की सुर्खियों मे बने रहना अब इसके आदत मे शुमार हो गया है।
केलो विहार कॉलोनी में सरकारी कर्मियों के लिए आवंटित जमीन को तत्कालीन तहसीलदार ने साठगांठ कर भूमाफिया मनीष देवांगन के नाम पर चढ़ा दी थी। ईओडब्ल्यू (इकॉनोमिक अफिस विंग) ने एसडीएम को पत्र भेज मामले की जांच करने और पूरी जानकारी भेजने कहा है। मामले को एसडीएम रायगढ़ से खरसिया एसडीएम को ट्रांसफर कर दिया है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए आवंटित जमीन को तहसीलदार द्वारा भूमाफिया के हक में किए जाने का यह मामला बहुत ही सुर्खियों मे है अतरमुड़ा में 1991 में सारे दस्तावेज की जांच के बाद तत्कालीन कलेक्टर हर्षमंदर ने खसरा नंबर 3 की ढाई एकड़ जमीन के साथ ही कुल 25 एकड़ जमीन शासकीय कर्मचारियों की हाउसिंग सोसाइटी को दी थी। बहादुर सिंह ठाकुर नामक शख्स ने तहसीलदार को आवेदन दिया। बताया कि छोटे अतरमुड़ा में खसरा नंबर 3 की लगभग ढाई एकड़ जमीन पहले उनके दादा और फिर पिता के नाम दर्ज थी। यह जमीन रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज कर दी गई है। बहादुर ने तहसीलदार को बताया कि द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 के न्यायालय में सिविल वाद 673/2002 जमीन उनकी पर (बहादुर) निर्णय हुआ है था कि और गलती से रिकॉर्ड में सरकार भूमि दर्ज कर दी गई। इसके बाद अलग-अलग समय पर सिविल कोर्ट में चले मामलों में परिवाद में लिखे वाद प्रश्नों पर बिंदुवार निष्कर्षों की उटपटांग व्याख्या कर तहसीलदार ने कोर्ट का आदेश बताया और सरकारी जमीन अतिक्रमण करने वाले के नाम कर दी। सितंबर में यह जमीन जैसे ही बहादुर सिंह के परिजन के नाम की गई वैसे ही जमीन दूसरे भूमाफिया को बेच दी गई। यह पूरा खेल केलो विहार सोसाइटी की जमीन को बिकवाने के लिए ही किया गया था। रजिस्ट्री और नामांतरण की जानकारी होने के बाद केलो विहार समिति के सदस्यों ने एसडीएम कोर्ट में नामांतरण रोकने के लिए आवेदन लगाया है। एसडीएम भी तहसीलदार के आदेश को गलत बता रहे हैं। नामांतरण रोकने और रजिस्ट्री रद्द कराने जैसी मांगों को लेकर केलो विहार सोसाइटी के लोगों ने एसडीएम रायगढ़ को आवेदन दिया। यहां मामला विचाराधीन था और अब अचानक मामले को रायगढ़ से खरसिया सब डिवीजन भेज दिया गया। भूमाफिया मनीष के नाम की गई केलो विहार की जमीन 33 कर्मचारियों के लिए आवंटित थी।

इस मामले में भी राजस्व अधिकारी कुछ नहीं कर रहे हैं कि रायगढ़ से खरसिया एसडीएम को मामला भेजे जाने के बाद एसडीएम प्रियंका वर्मा जांच कैसे करेंगी। जमीन का रिकार्ड देखने, मौका मुआयना और दूसरी औपचारिकता पूरी करने खरसिया के आरआई, पटवारी आएंगे या यहां के आरआई पटवारी ही जांच करके रिपोर्ट भेजेंगे। वैसे रायगढ़ से आरआई पटवारी तो पहले ही जांच कर चुके हैं और यदि इनकी मंशा ठीक नहीं हुई तो खरसिया एसडीएम के कहने पर भी ये सही जांच कैसे करेंगे। जिन तहसीलदार लोमश मिरी पर जमीन भूमाफिया के नाम चढ़ाने का आरोप है, वे वर्तमान में खरसिया के तहसीलदार हैं, फिर खरसिया की राजस्व टीम भी मामले में निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई कैसे करेगी।
केलो विहार सोसाइटी को आवंटित जमीन जैसे ही भूमाफिया मनीष के नाम पर की गई, उसे बेच दिया गया। रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए कार्रवाई शुरू हुई तो बिना इश्तेहार और सोसाइटी को जानकारी दिए बगैर ही प्रक्रिया पूरी किए जाने पर आपत्ति करते हुए एसडीएम रायगढ़ के समक्ष आपत्ति की गई। मनीष को डर था कि एसडीएम जांच करेंगे तो फर्जीवाड़ा खुल जाएगा और रजिस्ट्री रद्द होने का रास्ता साफ होगा। मिली जानकारी के अनुसार बिलासपुर कमिश्नर से अपील करते हुए भूमाफिया ने रायगढ़ एसडीएम की जांच पर संदेह जताया और कहा कि उन्हें रायगढ़ एसडीएम से न्याय की उम्मीद नहीं है और इसके बाद मामला रायगढ़ से खरसिया एसडीएम को भेज दिया गया।

यहा प्रश्न यह उठता है कि
एसडीएम खरसिया क्या रायगढ़ में संबंधित हलकों में तैनात पटवारी, तहसीलदार से जानकारी मांगेंगे या खरसिया से अपने तहसीलदार, आरआई पटवारियों को जांच करने के लिए भेजेंगी।
कुल मिलाकर अब जिला कलेक्टर कार्तिकेय गोयल को ही इस मामले मे पहल करनी होंगी ताकि भूमाफिया का आतंक राज समाप्त हो सके।












