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कान्हा ग्रीनस..के साथ दो अन्य कालोनियो को कैसे मिल जाती हैं अनुमति 10 फ़िट के सडक वाले भूमि पर !!!!!!! ऊपर से नीचे तक भरकर चांदी काटा हैं कर्मचारी अधिकारियो नें !!!!! पटवारी आर आई की तो किस्मत चमक उठी होंगी !!!!!! 10 फ़िट के रोड मे कैसे मिला तीन तीन कालोनियो को कैसे मिली मंजूरी :: जाँच का हैँ विषय !!!!!! पर जाँच करें कौन !!!! सब डूबे हैँ भ्रष्टाचार के आकंठ मे !!!!! रेरा या जो भी संस्थान 40 फ़िट का रोड होने पर ही अनुमति देते हैँ कहा दुबक कर बैठ गए हैँ !!!!!! क्या नियम कानून जैसे कोई चीज नहीं ?????10 फ़िट की गली के भरोसे साईं मंगलम, स्वर्ण भूमि, कान्हा ग्रीन्स और एक अन्य निर्माणाधीन प्रोजेक्ट को खड़ा कर दिया गया है !!!!!!! जहाँ नियमों का हुआ ‘चीरहरण’ !!!!!..गली बनी ‘हाईवे’: यह मामला सत्ता, रसूख और प्रशासनिक अनदेखी के उस गठजोड़ को दर्शाता है, जहाँ नियम कागजों पर सिमट कर रह गए हैं !!!!!.विशेष रिपोर्ट: रसूख के आगे नतमस्तक प्रशासन और नियमों की बलि!!!!!!.

साकेत पाण्डेय... 7869475276.....

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10 फ़िट की गली के भरोसे , कान्हा ग्रीन्स और दो अन्य निर्माणाधीन प्रोजेक्ट को खड़ा कर दिया गया है…..जहाँ नियमों का हुआ ‘चीरहरण’…..गली बनी ‘हाईवे’: यह मामला सत्ता, रसूख और प्रशासनिक अनदेखी के उस गठजोड़ को दर्शाता है, जहाँ नियम कागजों पर सिमट कर रह गए हैं…..विशेष रिपोर्ट: रसूख के आगे नतमस्तक प्रशासन और नियमों की बलि…..

रायगढ़ (अतरमुड़ा): शहर के टीवी टावर क्षेत्र में विकास के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे निर्माण कार्य अब आम जनता के लिए मुसीबत का सबब बन गए हैं। एक 10 फीट की संकरी गली को कागजों और रसूख के दम पर 30 फीट का मुख्य मार्ग दिखाकर तीन-तीन बड़ी कॉलोनियों का निर्माण कर दिया गया है।

जहाँ नियमों का हुआ ‘चीरहरण’..गली बनी ‘हाईवे’:

 

डॉ. शलभ अग्रवाल के निवास के पास स्थित लगभग आधा किलोमीटर लंबी संकरी गली को बिल्डरों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर चौड़ी सड़क के रूप में प्रोजेक्ट किया।कॉलोनियों की बाढ़: इसी एक गली के भरोसे साईं मंगलम, स्वर्ण भूमि, कान्हा ग्रीन्स और एक अन्य निर्माणाधीन प्रोजेक्ट को खड़ा कर दिया गया है।

जाम का जंजाल

बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के अभाव में इस क्षेत्र में आए दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है।

संस्थागत मिलीभगत का आरोप

इस पूरे प्रकरण में रेरा (RERA), जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की भूमिका पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं

RERA की चुप्पी: आरोप है कि रेरा के अधिकारी बिल्डरों के इशारे पर काम कर रहे हैं और जमीनी हकीकत देखे बिना ही प्रोजेक्ट्स को क्लियरेंस दी जा रही है।

राजस्व विभाग की अनदेखी: 10 फीट की गली को 30 फीट के रास्ते के रूप में कैसे सत्यापित किया गया? यह राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्न है।

प्रशासनिक नतमस्तक: स्थानीय प्रशासन बिल्डरों के ‘आभामंडल’ और प्रभाव के आगे मौन खड़ा है, जिससे अवैध को वैध बनाने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।

यह मामला केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र और रसूखदार बिल्डरों के बीच उस ‘नेक्सस’ का है, जो शहर के व्यवस्थित विकास को दीमक की तरह चाट रहा है


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